yaar tum hi mirii mohabbat ho | यार तुम ही मिरी मोहब्बत हो

  - Harsh Kumar Bhatnagar

यार तुम ही मिरी मोहब्बत हो
काश तुमको भी मेरी आदत हो

मेरी ग़ज़लों में ज़िक्र है तेरा
इन को पढ़ कर तुझे भी हैरत हो

मर गया लड़का इक मोहब्बत में
काश उसको नसीब जन्नत हो

बेचा है जिस्म इक तवायफ़ ने
धंधे में थोड़ी सी तो लागत हो

पोल सब की तो खुल ही जाएगी
गर मिरे घर में एक औरत हो

उस ने बर्बाद है किया मुझको
सो उसे थोड़ी सी तो ग़ैरत हो

हार जाते हैं सब मोहब्बत में
अब भले हाथ में वकालत हो

एक टक देखा है मुझे उसने
यार अब तो मुझे इज़ाफ़त हो

हम ही क्यूँँ पीछा अब करें उसका
थोड़ी उसकी तरफ़ से हरकत हो

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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