साथ में माँ सदा हुआ करती
हर्फ़-दर-हर्फ़ वो दुआ करती
ख़ूब सबका ख़याल भी रखती
ख़िज़्र जैसी वही हुआ करती
सिर्फ़ गिर्या अगर कहीं सुनती
हाथ दिल से वही छुआ करती
क्या किसी के लिए नहीं करती
शख़्सियत और ही हुआ करती
राह माँ से रहे जुदा कोई
वो मुसीबत भरी हुआ करती
वो फ़तूही बुना कभी करती
फिर ख़ुशी से उसे छुआ करती
एक किरदार में न माँ जीती
सच में रहमत वही हुआ करती
मसअला जब कभी रहे दिल का
सिर्फ़ दिल से वही दुआ करती
हाथ सर हो अगर कभी माँ का
फिर न कोई कमी हुआ करती
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