वस्ल में फ़ुर्क़तें निकल आईं
इश्क़ में वहशतें निकल आईं
इश्क़ तो इश्क़ है भला इस में
ये कहाँ नफ़रतें निकल आईं
मैं ने यूँ ही कहा बिछड़ने का
लाख फिर सूरतें निकल आईं
देख 'क़ैसर' की ख़स्ता-हाली को
अक़्ल से हैरतें निकल आईं
— Meem Maroof Ashraf
इश्क़ में वहशतें निकल आईं
इश्क़ तो इश्क़ है भला इस में
ये कहाँ नफ़रतें निकल आईं
मैं ने यूँ ही कहा बिछड़ने का
लाख फिर सूरतें निकल आईं
देख 'क़ैसर' की ख़स्ता-हाली को
अक़्ल से हैरतें निकल आईं
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