बा'द मुद्दत के रहगुज़र महके
तू जो आए तो सारा घर महके
आई आने की जो ख़बर महके
अपने क्या यार अब दिगर महके
आज फिर ख़्वाब में वो आए हैं
आज फिर मेरे दिल जिगर महके
कहते सब लोग हैं ख़ुदा उस को
पारसा है वो उम्र भर महके
ख़्वाहिशें उस बहार की सब को
जिस के आते ही हर शजर महके
बूँद बारिश की जो पड़ी पहली
गाँव महके है और नगर महके
आप ही क्या हैं इस ज़माने में
उस की रहमत से बे-हुनर महके
— Meena Bhatt















