jab se us bewafa ne baal rakhe | जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे

  - Meer Taqi Meer

जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
सैद बंदों ने जाल डाल रखे

हाथ क्या आवे वो कमर है हेच
यूँँ कोई जी में कुछ ख़याल रखे

रह-रव-ए-राह ख़ौफ़नाक 'इश्क़
चाहिए पाँव को सँभाल रखे

पहुँचे हर इक न दर्द को मेरे
वो ही जाने जो ऐसा हाल रखे

ऐसे ज़र दोस्त हो तो ख़ैर है अब
मलिए उस से जो कोई माल रखे

बहस है नाक़िसों से काश फ़लक
मुझ को इस ज़ुमरे से निकाल रखे

समझे अंदाज़ शे'र को मेरे
'मीर' का सा अगर कमाल रखे

  - Meer Taqi Meer

Aah Shayari

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