नहीं रखते थे हम ग़म को सँजोकर तुम सेे पहले
हँसा करते थे हम भी शाद हो पर तुम सेे पहले
हमारा 'इश्क़ तुमपे बोझ था तो बोल देते
दिल अपना तोड़ देते हम सितमगर तुम सेे पहले
निकल आए तुम्हारे बाद घर से ऊब कर के
रहा करते थे हम भी अपने भीतर तुम सेे पहले
मेरे हालात पूछे और फिर पूछा तुम आए
गए हैं लोग जितने मुझ सेे मिलकर तुम सेे पहले
कहा हो मैंने कितनी बार भी पर झूठ है ये
नहीं देखा था मैंने तुम सेे बेहतर तुम सेे पहले
न होंगी तुम सेे नम अब्रेे-करम वो रेत आँखें
इसी कोशिश में आया था समंदर तुम सेे पहले
नहीं होता किसी पर जो तुम्हारे बाद मोहित
हुआ करता था शायद हर किसी पर तुम सेे पहले
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