लगाऊ कितनी भी ताकत ये दिल नहीं लगता

तुम्हारे बिन किसी सूरत ये दिल नहीं लगता

मैं रात भर तिरे ख़्वाबों की राह ताकत हूँ
अजीब हैं शब-ए-फ़ुर्क़त ये दिल नहीं लगता

ख़ुदारा कर कोई तावीज़ मैं परेशां हूँ
ख़ुदारा पढ़ कोई आयत ये दिल नहीं लगता

तुम्हारी याद से कोई गिला नहीं मुझ को
हैं मेरे दिल में ही दिक़्क़त ये दिल नहीं लगता

मैं सोगवार नहीं हूँ मिरा मिज़ाज़ हैं ये
हैं मुझ

में ग़म की वो वुसअ'त ये दिल नहीं लगता
ग़मों ने चाट लिया इस तरह मिरे दिल को

हो कितनी शान-ओ-शौकत ये दिल नहीं लगता

तरह-तरह के हसीं-ओ-जलील आए पर
तिरे सिवा किसी क़ीमत ये दिल नहीं लगता

ख़ुदा बता मुझे आख़िर ये दिल बनाया क्यो
तू जानता था न दिक्कत ये दिल नहीं लगता

सुनो ज़रा मुझे तुम से हाँ खेर छोड़ो अब
लो कर रहा हूँ मैं हिजरत ये दिल नहीं लगता

— Moin Hasan

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