मेरे रोने पे रोया करता था
कोई तो था जो मेरा अपना था
पूछता हूँ ये आईने से अब
क्या मैं पहले भी इतना तन्हा था
लोग इक दिन ये कह रहे होंगे
कल ही देखा था कल तो अच्छा था
सारी दुनिया की बात सुनता कौन
वो जो कहती थी मान लेता था
अपनी बद-क़िस्मती कहूँ किस को
पास दरिया थी फिर भी प्यासा था
साथ हैं मस्ख़रे बहुत लेकिन
वो नहीं है जो रोया करता था
— Murari Mandal















