कुछ न बिगड़ा है ख़ुश बहुत हूँ मैं

वक़्त जैसा है ख़ुश बहुत हूँ मैं

मुझ को कोई नहीं समझ पाया
सब को लगता है ख़ुश बहुत हूँ मैं

यूँॅं नज़र भर के मेरी आँखों को
देखता क्या है ख़ुश बहुत हूँ मैं

जिस ने छोड़ा था मार कर मुझ को
वो भी तन्हा है ख़ुश बहुत हूँ मैं

— Murari Mandal

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