ख़्वाब था या ख़याल था क्या था
मेरे पहलू में रात जा कर वो
माह था या हिलाल था क्या था
चमकी बिजली सी पर न समझे हम
हुस्न था या जमाल था क्या था
शब जो दिल दो दो हाथ उछलता था
वज्द था या वो हाल था क्या था
जिस को हम रोज़-ए-हिज्र समझे थे
माह था या वो साल था क्या था
— Mushafi Ghulam Hamdani















