kai din se koi hichki nahin hai | कई दिन से कोई हिचकी नहीं है

  - Nadim Nadeem

कई दिन से कोई हिचकी नहीं है
वो हम को याद अब करती नहीं है

सिवा तेरे जिधर से कोई आए
हमारे दिल में वो खिड़की नहीं है

मैं जिस दरिया में काँटा डालता था
सुना है अब वहाँ मछली नहीं है

थीं जितनी सब कुएँ में फेंक आए
हमारे पास अब नेकी नहीं है

  - Nadim Nadeem

Dariya Shayari

Our suggestion based on your choice

    अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
    हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
    Bashir Badr
    38 Likes
    उतरी हुई नदी को समंदर कहेगा कौन
    सत्तर अगर हैं आप बहत्तर कहेगा कौन

    पपलू से उनकी बीवी ने कल रात कह दिया
    मैं देखती हूँ आपको शौहर कहेगा कौन
    Read Full
    Paplu Lucknawi
    26 Likes
    ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
    जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
    Abhishek shukla
    22 Likes
    ये नदी वर्ना तो कब की पार थी
    मेरे रस्ते में अना दीवार थी

    आप को क्या इल्म है इस बात का
    ज़िंदगी मुश्किल नहीं दुश्वार थी

    थीं कमानें दुश्मनों के हाथ में
    और मेरे हाथ में तलवार थी

    जल गए इक रोज़ सूरज से चराग़
    रौशनी को रौशनी दरकार थी

    आज दुनिया के लबों पर मुहर है
    कल तलक हाँ साहब-ए-गुफ़्तार थी
    Read Full
    ARahman Ansari
    13 Likes
    पत्थर दिल के आँसू ऐसे बहते हैं
    जैसे इक पर्वत से नदी निकलती है
    Shobhit Dixit
    11 Likes
    वो इतना शांत दरिया था मगर जब
    गया तो ले गया सब कुछ बहा के
    Siddharth Saaz
    25 Likes
    रात के जिस्म में जब पहला पियाला उतरा
    दूर दरिया में मेरे चाँद का हाला उतरा
    Kumar Vishwas
    48 Likes
    मैं हूँ सदियों से भटकता हुआ प्यासा दरिया
    ऐ ख़ुदा कुछ तो समंदर के सिवा दे मुझ को
    Afzal Ali Afzal
    36 Likes
    चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
    इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
    Bashir Badr
    78 Likes
    तुमको हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है
    पहले हमको चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला
    Abhishar Geeta Shukla
    15 Likes

More by Nadim Nadeem

As you were reading Shayari by Nadim Nadeem

    हम जो दीवार पे तस्वीर बनाने लग जाएँ
    तितलियाँ आ के तिरे रंग चुराने लग जाएँ

    फिर न हो मख़मली तकिए की ज़रूरत मुझ को
    तेरे बाज़ू जो कभी मेरे सिरहाने लग जाएँ

    चाँद तारों में भी तब नूर इज़ाफ़ी हो जाए
    छत पे जब ज़िक्र तिरा यार सुनाने लग जाएँ

    चंद सिक्कों पे तुम इतराए हुए फिरते हो
    हाथ मुफ़्लिस के कहीं जैसे ख़ज़ाने लग जाएँ

    क्यूँ न फिर शाख़ शजर फूल सभी मुरझाएँ
    भाई जब सहन में दीवार उठाने लग जाएँ

    उस ने दो लफ़्ज़ में जो बातें कहीं थी मुझ से
    उस को मैं सोचने बैठूँ तो ज़माने लग जाएँ

    फिर ज़माने में न हो कोई परेशाँ 'नादिम'
    तेरे जैसे भी निकम्मे जो कमाने लग जाएँ
    Read Full
    Nadim Nadeem
    सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले
    ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले

    मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है
    हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले

    इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
    ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले

    हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग
    ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले

    इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें
    हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले

    फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे
    हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले
    Read Full
    Nadim Nadeem
    दुनिया की नज़रों में हम तो जोकर हैं
    सबको खुश रक्खें मतलब वो जोकर हैं

    ख़त्म कहानी कर के जब तुम ही खुश हो
    अपना क्या है यार अपन तो जोकर हैं
    Read Full
    Nadim Nadeem
    24 Likes
    सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले
    ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले

    मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है
    हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले

    इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
    ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले

    हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग
    ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले

    इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें
    हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले

    फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे
    हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले
    Read Full
    Nadim Nadeem
    ग़ौर से मुझ को देखता है क्या
    मेरे चेहरे पे कुछ लिखा है क्या

    मेरी आँखों में झाँकता है क्या
    तुझ को इन में ही डूबना है क्या

    मेरे होंटों को छू लिया उस ने
    क्या बताऊँ मुझे हुआ है क्या

    ऐ कबूतर ज़रा बता मुझ को
    उन की छत पर भी बैठता है क्या

    पर कटे पंछियों से पूछते हो
    तुम में उड़ने का हौसला है क्या

    फ़ासले इश्क़ में ही होते हैं
    तुझ को ये भी नहीं पता है क्या

    मेरी दुनिया में बस तू ही तू है
    अब बता तेरा फ़ैसला है क्या

    प्यार से माँग ली है जान उस ने
    मेरे हिस्से में अब बचा है क्या

    चल कहीं दूर चलते हैं 'नादिम'
    घर को जाने में भी रखा है क्या
    Read Full
    Nadim Nadeem

Similar Writers

our suggestion based on Nadim Nadeem

Similar Moods

As you were reading Dariya Shayari Shayari