मिरी जाँ पर ये पत्थर इस लिए भारी ज़ियादा है

मोहब्बत कम तिरे लहजे में ग़म-ख़्वारी ज़ियादा है

ये सब से मुख़्तसर रस्ता है इस वादी में जाने का
मगर इस पर सफ़र करने में दुश्वारी ज़ियादा है

हम अपनी राह में दीवार बन जाते हैं ख़ुद अक्सर
हमारा मसअला ये है कि ख़ुद्दारी ज़ियादा है

मोहब्बत के क़रीब आया तो अंदाज़ा हुआ मुझ को
कि दिलकश घर से घर की चार दीवारी ज़ियादा है

अभी ये बहस 'नादिर' वक़्त की चौखट पे रखते हैं
ये कल देखेंगे किस का काम मेयारी ज़ियादा है

— Nadir Ariz

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