तेरा मेरा साथ है जब तक दुनिया में सब अपना है
बिछड़ेंगे ये सत्य है लेकिन कुछ संवाद तो लिखना है
मध्य मार्ग में रुक जाऍंगे मर जाऍंगे फिर दोनों
उस से पहले इस दुनिया से दूर कहीं तक चलना है
एक नदी के तटबंधों से हम दोनों हैं लेकिन फिर
सागर में जा कर गिरना है तब जा कर के मिलना है
प्रेम किया है इसीलिए तो ये पर्याय हमारा है
बाती बन जलते रहना है मोम के जैसे गलना है
इस दुनिया से कूच किया है तो ये हासिल है अपना
दूर फ़लक पर तारों का इक जोड़ा और निखरना है
— nakul kumar















