jo jahaan bhar se dar kinaara hain | जो जहाँ भर से दर किनारा हैं

  - Nakul kumar

जो जहाँ भर से दर किनारा हैं
क्यूँँ ग़मों को वो इतना प्यारा हैं

अश्क आँखों से गिर न जाये कहीं
पत्थरों ने हमें पुकारा हैं

ग़म दिए उसने इस मोहब्बत से
दिल कहे मुझ को सब गवारा हैं

आज टूटेगा आसमाँ से जो
वो शब-ए-हिज्र का सितारा हैं

कशमकश सब हमीं पे भारी हैं और
फ़ैसला भी यहाँ हमारा हैं

हम जुदा ख़ुद से अब तलक हैं और
उस को इक ग़ैर का सहारा हैं

दरमियाँ कोई भी गिला न रहा
ये जुदाई का इस्तिआरा हैं

दिल के बाज़ार का हैं हाल बुरा
दिल का होता यहाँ ख़सारा हैं

रौशनाई से लोग अंधे बने
तीरगी का ''अजब नज़ारा हैं

  - Nakul kumar

Breakup Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nakul kumar

As you were reading Shayari by Nakul kumar

Similar Writers

our suggestion based on Nakul kumar

Similar Moods

As you were reading Breakup Shayari Shayari