तुम ने केवल ये मोहब्बत देखी है
हम ने तो कर के हक़ीक़त देखी है
चीज़ें जो थीं आज़मा सब ली गईं
लगने वाली हम ने आदत देखी है
देखा तुम को जब भी पाया हम ने है
चलती फिरती हम ने आफ़त देखी है
ये लुभाना ये दिखावा ठीक है
क्या कभी तुम ने नज़ाकत देखी है
पूछते हो हर किसी का हाल तुम
तुम ने क्या अपनी भी हालत देखी है
— Nikunj Rana















