एक छोटी सी ख़ुशी है ज़िंदगी
जैसे कोई फुलझड़ी है ज़िंदगी
ग़म का दरिया क्या समंदर पी चुकी
तब कहीं ऐसे खिली है ज़िंदगी
मौत के उसपार फिर नवरूप ले
खिलखिलाकर हँस रही है ज़िंदगी
यह दुआ हो बद्दुआ हो या सज़ा
जो भी हो पर रसभरी है ज़िंदगी
नेकियों की कर कमाई ऐ बशर
इसलिए तुझको मिली है ज़िंदगी
माँ पिता का है ये आशिर्वाद शुभ
'नित्य' कर्मों की गली है ज़िंदगी
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