gar ahinsa ki hui haar to phir kya hogaa | गर अहिंसा की हुई हार तो फिर क्या होगा

  - Nityanand Vajpayee

गर अहिंसा की हुई हार तो फिर क्या होगा
आई ग़द्दारों की सरकार तो फिर क्या होगा

कुछ जो इंसाँ के लहू में हैं सने हाथ वही
बन गये तख़्त के हक़दार तो फिर क्या होगा

रहनुमा ख़ुद को बताने लगे सय्याद भी अब
मौत बाँटेंगे धुआँधार तो फिर क्या होगा

ज़िम्मेदारी दो जिन्हें गोश्त की रखवाली की
निकलें' वो गिद्धों के सरदार तो फिर क्या होगा

सारे क़िरदार हैं क़ातिल तो कहे कौन किसे
अहले मनसब हों गुनहगार तो फिर क्या होगा

तालिबे इल्म जिन्हें लोग समझ बैठे हैं
कल को निकले वही अय्यार तो फिर क्या होगा

'नित्य' मौतों के फ़रिश्तों से है उम्मीद भी क्या
ताज पहनें कहीं हथियार तो फिर क्या होगा

  - Nityanand Vajpayee

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