भूलने में जो ज़माने लगे
ख़्वाब में वो लोग आने लगे
नज़रें नहीं मिल रहीं उन की अब
कुछ है जो हम से छुपाने लगे
बदली है रुत तो ये आया नज़र
पंछी नए घर बसाने लगे
वक़्त के धागे से सिलते नहीं
ज़ख़्म जो दिल पर पुराने लगे
देखना था बाग़ी है कौन कौन
दोस्तों को आज़माने लगे
— Paras Angral















