kabhi soorat nahin hoti kabhi seerat nahin hoti | कभी सूरत नहीं होती कभी सीरत नहीं होती

  - Parul Singh "Noor"

कभी सूरत नहीं होती कभी सीरत नहीं होती
मुहब्बत सच्ची हो जाये मुझे नौबत नहीं होती

इन्हीं दो बातों पे बस बात उन सेे हो नहीं पाती
कभी फ़ुर्सत नहीं होती कभी हिम्म्मत नहीं होती

हज़ारों झूठ वो आँखें मिला के बोल देता है
मुझे इस बात की हैरत उसे हैरत नहीं होती

मैं भी घर जाने की जल्दी न करती शाम से पहले
कभी डरती नहीं मैं भी अगर औरत नहीं होती

अलग अब खूं के रिश्ते कर दिए जाते है शर्तों पे
निभाते प्यार ही गर दरमियाँ दौलत नहीं होती

मुझे तुम मील का पत्थर समझ लो मान जाओ 'नूर'
चलो आगे बढ़ो मंज़िल मिरि किस्मत नहीं होती

  - Parul Singh "Noor"

Kismat Shayari

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