jahaan kaise hua raushan ye kaisa falsafa hai dekh | जहाँ कैसे हुआ रौशन ये कैसा फ़लसफ़ा है देख

  - Praveen Bhardwaj

जहाँ कैसे हुआ रौशन ये कैसा फ़लसफ़ा है देख
ये किस की आँख का तारा फ़लक से जा लगा है देख

ये कैसे जी रहे हैं हम है कैसी ज़िंदगी अपनी
किसी का कुछ बिगाड़ा या किसी की बद-दुआ है देख

सभी ने कर दिया मुझको नज़र-अंदाज़ जाने क्यूँँ
सभी की आँख में अटका हुआ हूँ क्या किया है देख

जो भी गुम हो गया था कल वो अबतक लौट आया है
कहाँ नाराज़ होते हो किधर वो खो गया है देख

यही समझा नहीं अबतक किया सबपे भरोसा क्यूँ
सभी ने तोड़ डाला फिर से मेरा हौसला है देख

हमारे फूल पर ये सब कहाँ से तितलियाँ आई
हमारे दिल के आँगन को भी कब्ज़ा क्यूँँ किया है देख

नहीं आराम अपना है नहीं है दिल-लगी अपनी
रखो तुम हर ख़ुशी अपनी हमें ग़म मिल गया है देख

किसी से हारने का ग़म हमें होता नहीं है अब
सभी को जीतना होगा मुझे तो हारना है देख

  - Praveen Bhardwaj

Gham Shayari

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