इकधुआँउठरहाहैआँगनसे
हैंअभीकुछचराग़रौशनसे
इसमेंशामिलहैबू-ए-अफ़्लाकी
येहवाआरहीहैकिसबनसे
देनेआयाहूँफ़त्हकामुज़्दा
भागआयानहींहूँमैंरनसे
मंज़िलोंकीभीआरज़ूहैबहुत
डरभीलगताहैमुझकोरन-बनसे
अबभीक्यारातकेअंधेरेमें
शोलाउठताहैगुलशन-ए-तनसे
सुर्ख़-रूइश्क़कीबदौलतहूँ
किमैंइसआगमेंहूँबचपनसे
येज़मानाहैचापलूसीका
हमतोवाक़िफ़नहींइसीफ़नसे
मुझसेपहचानतेरीक़ाएमहै
मैंतुम्हेंचाहताहूँतन-मनसे