ज़िंदगी की हर कहानी बे-असर हो जाएगी

हम ना होंगे तो ये दुनिया दर-ब-दर हो जाएगी

पाँव पत्थर कर के छोड़ेगी अगर रुक जाइए
चलते रहिए तो ज़मीं भी हम सेफ़र हो जाएगी

तुम ने ख़ुद ही सर चढ़ाई थी सो अब चक्खो मज़ा
मैं न कहता था के दुनिया दर्द-ए-सर हो जाएगी

तल्ख़ियाँ भी लाज़िमी हैं ज़िन्दगी के वास्ते
इतना मीठा बनकर मत रहिए शकर हो जाएगी

जुगनुओं को साथ ले कर रात रौशन कीजिए
रास्ता सूरज का देखा तो सहर हो जाएगी

— Rahat Indori

More by Rahat Indori

Other ghazal from the same pen

See all from Rahat Indori →

Rishta Shayari Collection

Shers of rishta shayari collection.

All Rishta Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling