झूठा है सच्चा भी तो हो सकता है

चश्मा है गन्दा भी तो हो सकता है

बारिश केवल बादल की मजबूरी है
बादल का ग़ुस्सा भी तो हो सकता है

हो सकता है दीवालों में सीड़न हो
आँगन पर अच्छा भी तो हो सकता है

आँसू पोंछ रही मुफ़लिस की उम्मीदें
महँगा कल सस्ता भी तो हो सकता है

हो सकता है ऊब गई हो मंज़िल भी
झगड़ा इक रस्ता भी तो हो सकता है

— Atul K Rai

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