आप की शान तो बजा साईं
फिर भी है एक मशवरा साईं
सिर्फ़ इक शे'र की तवक़्क़ो में
मैं ने लिक्खा है बारहा साईं
सब के हालात बद नहीं होते
दिल भी होता है बे-वफ़ा साईं
हिज्र के शौक़ से बचा कीजे
हिज्र का शौक़ है बुरा साईं
बज़्म-ए-जानाँ से उठ के यूँ जाना
हम को अच्छा नहीं लगा साईं
आप की बात मान ली वर्ना
हम भी करते नहीं वफ़ा साईं
शे'र होता है या नहीं होता
शे'र का ये है मो'जिज़ा साईं
— Rakesh Mahadiuree















