हुस्न की इंतिहा नहीं होती
दर्द-ए-दिल की दवा नहीं होती
अहद के और भी तरीके हैं
जान दे के वफ़ा नहीं होती
ज़िंदगी मौत से गले मिल के
उम्र भर को जुदा नहीं होती
ज़िंदगी हादसों में होती है
ज़िंदगी हादसा नहीं होती
गुल पे नज़रें हज़ार होती हैं
गुल-बदन यूँ कज़ा नहीं होती
उस सदा में शराब होती है
वो सदा ये सदा नहीं होती
ये ही अंतिम जुगाड़ है प्यारे
नर्क में अप्सरा नहीं होती
— Rakesh Mahadiuree















