raah chalte ja rahe hain be-vafa ke saath | राह चलते जा रहे हैं बे-वफ़ा के साथ

  - Rakesh Mahadiuree

राह चलते जा रहे हैं बे-वफ़ा के साथ
ख़त्म हो न ज़िंदगी ये हादसा के साथ

जान-ए-मन मैं आइनों में भी तुम्हारा रूप
देखता जो हूँ कभी तो प्रार्थना के साथ

आते जाते लोगों में हैं अपनों के निशान
डाँटते भी हैं अगर तो मशवरा के साथ

हर ख़राब चीज़ में भी ठीक चीज़ है
दुनिया भी हसीन है ये दिलरुबा के साथ

ये ग़रीब लोग क्या ही मुँह लगेंगे साब
ये तो हक़ भी माँगते हैं प्रार्थना के साथ

जाते जाते उस का नाम याद रह गया
अब ये रिश्ता ख़त्म समझो राब्ता के साथ

हम किसी अमीर घर के पेड़ तो नहीं
हमको ख़्वाब देखना है रास्ता के साथ

हम तो एक लड़की को भी पा नहीं सके
जाने कैसे लोग होंगे अप्सरा के साथ

  - Rakesh Mahadiuree

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