यहाँ पे जिस की जैसी हैसियत है
जहाँ में उस की वैसी अहमियत है
बना ले दुश्मनों को दोस्त अपना
करिश्मा साज़ उस की शख़्सियत है
उसे भाने लगा है और कोई
जहाँ में अपनी अपनी कैफ़ियत है
तुम्हारा दिल है चाहे जिस को दे दो
कहा कब मैं ने मेरी मिलकियत है
ख़ुशी से ज़ख़्म सारे खिल उठे हैं
जब उस ने पूछा हम से ख़ैरियत है
भटकना हो गया है ख़त्म मेरा
मिली जो दिल में उस के शहरियत है
तुम्हारे बिन समय बस कट रहा है
मलक ये वक़्त कितना बोरियत है
— Ram Singar Malak















