जब तेरी याद मेरे साथ हुआ करती है
चाँद तारों से मेरी बात हुआ करती है
कैसे कह दूँ कि बहुत दिन से नहीं देखा तुझे
रोज़ ख़्वाबों में मुलाक़ात हुआ करती है
तेरे जैसी हैं कहाँ और किसी की आँखें
देख भर लें तो करामात हुआ करती है
लुत्फ़ मिलता ही नहीं वैसा किसी मौसम में
सूनी रातों में जो बरसात हुआ करती है
ये तेरी आँख-मिचौली का असर हो शायद
दिन निकलता है कभी रात हुआ करती है
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