दिल गवाँ कर देखता है
शाम आ कर देखता है
रो रहा हूँ जिस के ख़ातिर
मुस्कुरा कर देखता है
मिट गए हैं नक्स ए पा तो
वो बना कर देखता है
— Sabir Pathan
शाम आ कर देखता है
रो रहा हूँ जिस के ख़ातिर
मुस्कुरा कर देखता है
मिट गए हैं नक्स ए पा तो
वो बना कर देखता है
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