राह -ए-रसूल चलने को तय्यार कौन है
हम जैसा उस ख़ुदा का तलबग़ार कौन है
सबने नक़ाब ओढ़ के रक्खे हैं चार पाँच
किसपे करें यक़ीं के वफ़ादार कौन है
किस के लिए चराग़ ये जलते हैं रात दिन
इस दर्जा घर में आप के बीमार कौन है
हर बार मेरी पीठ पे होता है वार क्यूँ
अपनों के बीच में छुपा ग़द्दार कौन है
अपनी अना पे वो है और अपनी अना पे मैं
कैसे हो फ़ैसला के ख़तावार कौन है
मुझ को लगा चुके हो ठिकाने से ख़ैर तुम
ये तो बताओ अगला गिरफ़्तार कौन है
हम ने छुपा लिए हैं सभी ज़ख़्म आँखों में
हम से बड़ा यहाँ पे अदाकार कौन है
यूँ ही किसी पे भी लुटा देते हैं आप दिल
इतना तो देखिए के ख़रीदार कौन है
इस बार हम रक़ीब से मिलने को आए हैं
हम भी तो देखें आप का दिलदार कौन है















