faqat tere nazdeek aane se pahle | फ़क़त तेरे नज़दीक आने से पहले

  - SALIM RAZA REWA

फ़क़त तेरे नज़दीक आने से पहले
बहुत ग़म सहे मुस्कुराने से पहले

बहारों का इक शामियाना  बना  दो 
ख़िज़ाओं के गुलशन में आने से पहले



ज़माने को तुमने दिया क्या है सोचो 

ज़माने पे उँगली उठाने से पहले



ग़रीबों की आहों से कैसे बचोगे 

ज़रा सोचना दिल दुखाने से पहले



वो मेरी मोहब्बत से रौशन हुआ है

फ़ज़ाओं में यूँँ जगमगाने से पहले
 


कभी चल के शोलों पे भी देखिएगा

रज़ा दिल की बस्ती जलाने से पहले

  - SALIM RAZA REWA

Charagh Shayari

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