kaun kahtaa hai bas nazar tak hai | कौन कहता है बस नज़र तक है 

  - SALIM RAZA REWA

कौन कहता है बस नज़र तक है 
वार उनका मेरे जिगर तक है 

मस्त नज़रों का मय जिधर तक है 
ख़ूबसूरत फ़ज़ा उधर तक है 

चाँद निकला है मेरे आँगन  में 
रौशनी मेरे बाम-ओ-दर तक है 

चाँद सूरज चले इशारे से 
उनके क़ब्ज़े में तो शजर तक है 

ग़म ख़ुशी ज़िंदगी में हैं शामिल
अब निभाना तो 'उम्र भर तक है

  - SALIM RAZA REWA

Budhapa Shayari

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