KHushboo ghuli nahin hai pavan men abhii talak | ख़ुशबू  घुली नहीं है पवन में अभी तलक

  - SALIM RAZA REWA

ख़ुशबू  घुली नहीं है पवन में अभी तलक
क्या मौसम-ए-ख़िज़ाँ है चमन में अभी तलक

 
मेरे सुनहरे ख़्वाब जलाकर हैं ख़ुश बहुत

करते हैं शोले रक़्स कफ़न में अभी तलक
 

इस रौशनी ने हमको चबाया है इस क़दर
दाँतों के हैं निशान बदन में अभी तलक

 
हर धर्म के गुलो से महकता है ये चमन

ख़ुशबू बसी है मेरे वतन में अभी तलक
 

अब तो बदन में पहले सी ताक़त नहीं रही
लज़्ज़त मगर वही है सुख़न में अभी तलक

  - SALIM RAZA REWA

Raushni Shayari

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