samajh raha tha jise apna Vaaqaii ab tak | समझ रहा था जिसे अपना वाक़ई अब तक

  - SALIM RAZA REWA

समझ रहा था जिसे अपना वाक़ई अब तक
वो कर रहा था मेरे दिल से दिल-लगी अब तक

हसीन जाल मोहब्बत का फेंकने वाले 

समझ चुका हूँ हर इक चाल मैं तेरी अब तक


मेरे बदन का लहू ख़ुश्क हो गया होता

अगर न होती मेरे जिस्म में नमी अब तक 


रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल सब तू है
मैं तेरे नाम से करता हूँ शाइरी अब तक


उछल-उछल के ख़ुशी नाचती थी आँगन में

खटक रही है उसी बात की कमी अब तक


वो जिसके हुस्न का चर्चा था सारे आलम में

भटक रही है वो गलियों में बावरी अब तक

उमड़ रहा है समुंदर मेरे ख़यालों का 

टपक रही है निगाहों से आगही अब तक

  - SALIM RAZA REWA

I love you Shayari

Our suggestion based on your choice

More by SALIM RAZA REWA

As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA

Similar Writers

our suggestion based on SALIM RAZA REWA

Similar Moods

As you were reading I love you Shayari Shayari