समझ रहा था जिसे अपना वाक़ई अब तक
वो कर रहा था मेरे दिल से दिल-लगी अब तक
हसीन जाल मोहब्बत का फेंकने वाले
समझ चुका हूँ हर इक चाल मैं तेरी अब तक
मेरे बदन का लहू ख़ुश्क हो गया होता
अगर न होती मेरे जिस्म में नमी अब तक
रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल सब तू है
मैं तेरे नाम से करता हूँ शाइरी अब तक
उछल-उछल के ख़ुशी नाचती थी आँगन में
खटक रही है उसी बात की कमी अब तक
वो जिसके हुस्न का चर्चा था सारे आलम में
भटक रही है वो गलियों में बावरी अब तक
उमड़ रहा है समुंदर मेरे ख़यालों का
टपक रही है निगाहों से आगही अब तक
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