ऐसे क्या देखते हो मुझ को तुम हैरानी से
मिली नहीं ये मंज़िल इतनी भी आसानी से
ना-मुमकिन जैसा तो कुछ भी नहीं है दुनिया में
पत्थर को भी काटा जा सकता है पानी से
देना है तो मेरे हिसाब से रोल दो मुझे
वर्ना निकाल दो इस किरदार को कहानी से
दोस्त बनाया तो फिर ऐब नहीं देखे जाते
मैं ने ये सब सीखा है कुंती सुत दानी से
जिस्म भले तुम फ़रेब देकर हासिल कर लोगे
रूह नहीं जीती जा सकती बे-ईमानी से
— Sandeep dabral 'sendy'















