केवल इतनी सी इनायत हो जाए
याँ उसको मेरी आदत हो जाए
आसान नहीं भू नभ का इक होना
कुछ कर मौला वो इक मत हो जाए
होने को तो हो सकता है कुछ भी
पर उसको मुझ सेे मुहब्बत हो जाए
उस गुल से अपना घर महकाना है
चाहे दुनिया से बगावत हो जाए
उसको पाने की ख़ातिर अब चाहे
इक दो सपनों की शहादत हो जाए
महफ़ूज़ रखूँगा अपनी तिजोरी में
इक बार वो मेरी दौलत हो जाए
झुमके पायल चूड़ी बिंदी काजल
याँ नाम मिरे उसकी नथ हो जाए
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