केवल इतनी सी इनायत हो जाए
याँ उस को मेरी आदत हो जाए
आसान नहीं भू नभ का इक होना
कुछ कर मौला वो इक मत हो जाए
होने को तो हो सकता है कुछ भी
पर उस को मुझ से मुहब्बत हो जाए
उस गुल से अपना घर महकाना है
चाहे दुनिया से बग़ावत हो जाए
उस को पाने की ख़ातिर अब चाहे
इक दो सपनों की शहादत हो जाए
महफ़ूज़ रखूँगा अपनी तिजोरी में
इक बार वो मेरी दौलत हो जाए
झुमके पायल चूड़ी बिंदी काजल
याँ नाम मिरे उस की नथ हो जाए
— Sandeep dabral 'sendy'















