vo to main hoon jo ab tak theek-thaak hoon varna | वो तो मैं हूँ जो अब तक ठीक-ठाक हूँ वरना

  - Sandeep dabral 'sendy'

वो तो मैं हूँ जो अब तक ठीक-ठाक हूँ वरना
ये इतने ग़म और किसी को पागल कर देते

  - Sandeep dabral 'sendy'

Dard Shayari

Our suggestion based on your choice

    हम ऐसे लोग भी जाने कहाँ से आते हैं
    ख़ुशी में रोते हैं जो ग़म में मुस्कुराते हैं

    हमारा साथ भला कब तलक निभाते आप
    कभी कभी तो हमीं ख़ुद से ऊब जाते हैं
    Read Full
    Mohit Dixit
    चारासाज़ो मिरा इलाज करो
    आज कुछ दर्द में कमी सी है
    Azhar Nawaz
    35 Likes
    ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
    हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
    Faiz Ahmad Faiz
    24 Likes
    ये ग़म हमको पत्थर कर देगा इक दिन
    कोई आ कर हमें रुलाओ पहले तो
    Siddharth Saaz
    हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
    न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
    Waheed Quraishi
    15 Likes
    मैं शा'इर हूँ मोहब्बत का
    मिरे दुख भी रसीले हैं
    Farhat Abbas Shah
    35 Likes
    उनके दुखों को शे'र में कहना तो था मगर
    लड़के समझ न पाएँ कभी लड़कियों का दुख
    Ankit Maurya
    52 Likes
    तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
    तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद
    Farhat Abbas Shah
    46 Likes
    पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
    फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
    Parveen Shakir
    33 Likes
    तुम्हारे बाद इस आँगन में फूल खिलने पर
    ख़ुशी हुई भी तो ये दुख हुआ कि दें किसको
    Mohit Dixit
    36 Likes

More by Sandeep dabral 'sendy'

As you were reading Shayari by Sandeep dabral 'sendy'

    सलीका तो नहीं मालूम हम को दीद का लेकिन
    झुकाती है नज़र को जब नज़र भर देखते हैं हम
    Sandeep dabral 'sendy'
    मैं तो था इक मामूली किरदार कहानी का
    राजा तो था कोई और मियाँ उस रानी का

    चाह रक़ीब यहाँ रखते हैं अब उसके लब की
    मैं तो केवल भूखा था उसकी पेशानी का
    Read Full
    Sandeep dabral 'sendy'
    कि मियाँ शक्कर की लज़्ज़त भी तब से फीकी लगती है
    जब से चूमा है उनके शीरीं से अधरों को हमने
    Sandeep dabral 'sendy'
    इसलिए ईद का करता हूँ इंतिज़ार
    ताकि अपने पिता के गले लग सकूँ
    Sandeep dabral 'sendy'
    क़दम इक इक बढ़ाने में सहर से शाम हो जाए
    कि मेरी रुख़सती के दिन सड़क भी जाम हो जाए

    ज़ियादा कुछ नहीं चाहूँ यहाँ चाहूँ फ़क़त इतना
    यहाँ इक रोज़ कुछ आँसू मिरे भी नाम हो जाए
    Read Full
    Sandeep dabral 'sendy'

Similar Writers

our suggestion based on Sandeep dabral 'sendy'

Similar Moods

As you were reading Dard Shayari Shayari