Sanjay
Sanjay
Sher

कोई धुन तारी नहीं कोई सनक बाक़ी नहीं

अब फ़लक को नाप आने की हुमक बाक़ी नहीं

अब नहीं वो तिश्नगी जिस को समुंदर चाहिए
मुझ में अब कुछ कर गुज़रने की ललक बाक़ी नहीं

— Sanjay

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