कोई धुन तारी नहीं कोई सनक बाक़ी नहींअब फ़लक को नाप आने की हुमक बाक़ी नहींअब नहीं वो तिश्नगी जिस को समुंदर चाहिएमुझ में अब कुछ कर गुज़रने की ललक बाक़ी नहीं— Sanjay