'umr bhar ka faasla ab 'umr bhar tarasaayega | 'उम्र भर का फासला अब 'उम्र भर तरसाएगा

  - Sanskriti Shree

'उम्र भर का फासला अब 'उम्र भर तरसाएगा
रास्ता उम्मीद का पल पल हमें तड़पाएगा

इस तमन्ना में गुजर जाएगी मेरी ज़िन्दगी
वो मुसाफ़िर इक न इक दिन लौटकर के आएगा

ये फिसलती रेत करती है इशारा दोस्तो
मौत के दिन दोनों हाथों में न कुछ रह जाएगा

बे रहम बारिश के डर से तुम कभी रुकना नहीं
क्यूँँंकि तुम ही रुक गए तो कारवाँ रुक जाएगा

फूल से हमको मिली है बे-वफ़ाई 'उम्र भर
इसलिए काँटा ही दिल को अब हमेशा भाएगा

मैं नशे में धुत हुई हूँ दो नशीली आँखों के
जाम बोतल और साग़र अब असर क्या लाएगा

  - Sanskriti Shree

Qabr Shayari

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