'उम्र भर का फासला अब 'उम्र भर तरसाएगा
रास्ता उम्मीद का पल पल हमें तड़पाएगा
इस तमन्ना में गुजर जाएगी मेरी ज़िन्दगी
वो मुसाफ़िर इक न इक दिन लौटकर के आएगा
ये फिसलती रेत करती है इशारा दोस्तो
मौत के दिन दोनों हाथों में न कुछ रह जाएगा
बे रहम बारिश के डर से तुम कभी रुकना नहीं
क्यूँँंकि तुम ही रुक गए तो कारवाँ रुक जाएगा
फूल से हमको मिली है बे-वफ़ाई 'उम्र भर
इसलिए काँटा ही दिल को अब हमेशा भाएगा
मैं नशे में धुत हुई हूँ दो नशीली आँखों के
जाम बोतल और साग़र अब असर क्या लाएगा
Read Full