हम ने तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं आने दिया
इक ग़ज़ल में भी तेरा नाम नहीं आने दिया
तू ने इक दिन हमें नाकाम कहा और हम ने
ख़ुद को अपने भी किसी काम नहीं आने दिया
इक निशानी भी फ़रामोश नहीं की उस की
एक भी ज़ख़्म को आराम नहीं आने दिया
अपनी पलकों में छुपाए रखे आँसू अपने
इक सितारा भी लब-ए-बाम नहीं आने दिया
ज़िन्दगी इस लिए पुर-कैफ़ कटी है 'सरवर'
दिल में अंदेशा-ए-अंजाम नहीं आने दिया
— Sarwar Khan Sarwar















