घर में ख़ुशहाली आई ज़माने के बा'द

मुझ को सब कुछ मिला तुझ को पाने के बा'द

छोड़ दो उस को अपने ही अब हाल पर
ख़ुद समझ जाएगा चोट खाने के बा'द

दुनिया वालों से उम्मीद रक्खी नहीं
रब से पाया है सब सर झुकाने के बा'द

चैन से सोने दो तुम बस अब तो उसे
कैसे सोया है वो थपथपाने के बा'द

शुक्र 'शाकिर' अदा यूँ ही करते रहो
ख़ूब देगा ख़ुदा आज़माने के बा'द

— Shakir Sheikh

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