unko bastii men rahna hai sirf hamaari hijrat hai | उनको बस्ती में रहना है सिर्फ़ हमारी हिजरत है

  - Shamsul Hasan ShamS

उनको बस्ती में रहना है सिर्फ़ हमारी हिजरत है
आने वाली सब नस्लों को मेरा 'इश्क़ नसीहत है

लोग तमाशा देख चुके मुझ दीवाने की चाहत का
डरते डरते नाच रहा हूँ 'इश्क़ में कितनी बरकत है

काट रहा हूँ यार तुम्हारी याद के गीले पेड़ों को
और किवाड़ों पे लिक्खा है ये भी एक मोहब्बत है

तुमने उसके दिल तक जाकर बेचैनी को अपनाया
दोस्त मैं समझा बात तुम्हारी यानी 'इश्क़ तिजारत है

छोड़ के जाना बात अलग है साथ में रहना बात अलग
आओ बैठो चाय पिएँ हम ये भी एक मोहब्बत है

हमने वस्ल के सारे कपड़े टाँग दिए दरवाज़ों पर
तुम क्या जानों हिज्र की लम्बी रातों में क्या लज़्ज़त है

  - Shamsul Hasan ShamS

Baaten Shayari

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