बातें गर हर शाम करेंगे हम दोनों

कर के बातें पछताऍंगे हम दोनों

बातें फिर बातों पे नहीं थमने वाली
बात के आगे इश्क़ करेंगे हम दोनों

बिगड़ेगी जब बात कोई हम दोनों में
बात बनाने को बात करेंगे हम दोनों

पहली बात के वक़्त नहीं सोचा था यूँ
इक शब आख़िरी बात करेंगे हम दोनों

हाथ पकड़ कर हम ने करी थी जो बातें
क्या वो बातें याद रखेंगे हम दोनों

टकराऍंगे हम जब इक दूजे से कहीं
कैसे मिलेंगे क्या सोचेंगे हम दोनों

बात नहीं अब कोई मिले पर हम जो कहीं
गले लगेंगे और रोऍंगे हम दोनों

— Shantanu Bhardwaj

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