tujhse bichhadke kuchh bhi gawara nahin kiya | तुझ सेे बिछड़के कुछ भी गवारा नहीं किया

  - karan singh rajput

तुझ सेे बिछड़के कुछ भी गवारा नहीं किया
फिर 'इश्क़ भी किसी से दुबारा नहीं किया

वो लाख था बुरा भले सब की नज़र में पर
उसने बुरा कभी भी हमारा नहीं किया

तुझ सेे बिछड़के कैसे गुज़ारे वो ज़िन्दगी?
बिन तेरे जिसने पल भी गुज़ारा नहीं किया

हाँ दोस्तो से भी है मोहब्ब्त मुझे अज़ीज़
पर दुश्मनों से मैं ने किनारा नहीं किया

हर जंग ज़िन्दगी की ख़ुदी लड़ते है 'करन'
इक 'उम्र से किसी को सहारा नहीं किया

  - karan singh rajput

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