ab fikr ke vujood se takra gaya hooñ main | अब फ़िक्र के वजूदस टकरा गया हूँ मैं

  - Shivang Tiwari

अब फ़िक्र के वजूदस टकरा गया हूँ मैं
करने लगा हूँ शायरी पगला गया हूँ मैं

लगने लगा है मन ये मेरा ज़िन्दगी में क्यूँ
ये कौन सी ख़ता की सज़ा पा गया हूँ मैं

उसके हसीन रुख़ पे उदासी जवान है
यानी मशक़्क़तों से भुलाया गया हूँ मैं

लड़ना पड़ा मुझे दिये सा आफ़ताब से
यानी तमाम ज़ीस्त सताया गया हूँ मैं

मैं ख़ुशनुमा सी रात के सीने का दर्द हूँ
सबकी हँसी के पीछे छुपाया गया हूँ मैं

यूँँ कारवाँ-ए-ज़ीस्त में था साथ हर कोई
फिर भी क़ज़ा के मोड़ से तन्हा गया हूँ मैं

  - Shivang Tiwari

Udas Shayari

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