भूल मेरी न तुझ सेे भुलाई गई
इक कहानी ज़फ़ा की बनाई गई
रंजिश-ए-बेजा पे था यक़ीं आपको
झूठ को सच बता जो उड़ाई गई
बस रक़ीबों की चाहत थी बर्बादियाँ
आग सारे चमन में लगाई गई
हर बुराई लगा हुस्न के माथे पे
हर कमी 'इश्क़ की है छुपाई गई
वस्ल को भूलकर आग दरिया किया
और उस पे जुदाई बढ़ाई गई
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shivang Tiwari
our suggestion based on Shivang Tiwari
As you were reading Dariya Shayari Shayari