मेरी बाहों में रहते सिमटकर नहीं
देखा करते दिल ओ जाँ यूँँ कटकर नहीं
एक हम जो तुम्हें देखते ही रहे
दूसरे तुम जो देखा पलटकर नहीं
दर्द के बीच भी मन में क्या फाँस है
क्यूँँ वो रोते गले से लिपटकर नहीं
बट के रहने लगी शय जहाँ की हर इक
देखा रहते हुए माँ को बटकर नहीं
शायरी राऍंगा ऐसे तो जाएगी
तेरा अंदाज़ दुनिया से हटकर नहीं
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shivang Tiwari
our suggestion based on Shivang Tiwari
As you were reading Andaaz Shayari Shayari