प्यार होता सभी को बदन देखकर
झूठ कहते हुआ मुझको मन देखकर
साधु का चोला सब ओढ़कर बैठे हैं
हक्का-बक्का खड़ा हूँ चलन देखकर
हैं कशिश से भरे पैरहन आज के
आँखें हटती नहीं पैरहन देखकर
दोष ग्वालों को देना मुनासिब नहीं
ख़ुद मचलती है राधा, किशन देखकर
तब बहेगा रगों में लहू प्यार का
यार दिल में बसा अपनापन देखकर
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