“है एक ऐसी भी लड़की”

वो इश्क़ है वो वफ़ा है
वो आयत है, इबादत है
वो दुआ है, वो आमीन है
वो सच है, वो यक़ीन है
वो मेरी धूप है, छाँव है
आसमाँ है, ज़मीन है
है एक ऐसी भी लड़की
जो सच में औला-तरीन है

वो थोड़ी सी पागल है
थोड़ी थोड़ी ज़हीन है,
उस की हरकतों में अल्हड़पन,
जिस का नक़्श आ'ला
जिस का चर्बा हसीन है,
हर भौंरा दिवाना उस का
जो बर्ग-ए-गुल पे नशीन है,
है एक ऐसी भी लड़की
जो सच में औला-तरीन है।

वो इस क़दर माहेरीन है
वही मेरी दामन भी है
वही मेरी आस्तीन है,
वो इमली सी खट्टी है
शहद सी मीठी है,
कभी वो चटपटी सी
कभी वो नमकीन है,
वो एक उम्दा परवाज़ है
एक आ'ला शाहीन है,
है एक ऐसी भी लड़की
जो सच में औला-तरीन है।

वो मेरी दुनिया है, जहान है
मेरी पगड़ी है, ज़बीन है,
मेरा क़लमा है, ईमान है
वो एक तशरीह-ए-दीन है,
वो बर्ग-ए-गुल है, काँटा है
वो मतीन है, वो महीन है,
वो नील-कँवल है, गुलाब है,
एक गुलदस्ता रंगीन है,
मैं अब क्या क्या लिखूँ
सर से पाँव तक वो हसीन है,
है एक ऐसी भी लड़की
जो सच में औला-तरीन है।

— Shivang Tiwari

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